Shayari and Poetry


न जाने क्यो मैं लिखती हूँ. न जाने क्या मैं लिखती हूँ
यह अक्षर है या दिल का अंदाज़. न मैं जानती हूँ न सोचती हूँ!


बहुत पूछा इस दिल से यह क्या है
कितना बोला मॅन से न कर मनमानी
ख़याल आते है, दर्द उठता है कहीं
उठते है हाथ उठती है कलाम
बस शब्दो के तोड़ मोड़ से
कुछ हांस के कुछ रो के
कुछ कला कृतीया करती रहेती हूँ
यह यहा बस मेरी बातें है… कुछ दिल से!!

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